पटना मेट्रो में 191 नयी नौकरी, निर्माण को जापान देगा लोन

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2024 में दौड़ने लगेगी पटना मेट्रो। पटना मेट्रो रेल कारपोरेशन बोर्ड ने बुधवार को अपनी बैठक में इस संभावना पर बाकायदा मुहर लगा दी कि दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन ही पटना मेट्रो बनाएगी। बोर्ड की बैठक में पीएमआरसी के लिए 191 पद सृजन संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। लेकिन तत्काल 30 पदों नियुक्ति की सहमति बनी है। इसके लिए शीघ्र ही लोक वित्त समिति के समक्ष प्रस्ताव भेजने की तैयारी है।

पटना मेट्रो निर्माण को जापान देगा लोन

राजधानी में मेट्रो दौराने के लिए जापान की वित्तीय संस्था जाइका (जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी) लोन देगी। पीएमआरसी (पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन) बोर्ड की बुधवार को हुई तीसरी बैठक में जापान से लोन लेने पर मुहर लग गई। पीएमआरसी बोर्ड के सीएमडी (अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक) चैतन्य प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में तीन एजेंडे पर निर्णय लिया गया। इसमें पटना मेट्रो निर्माण की जिम्मेदारी डीएमआरसी (दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन) को सौंपने की मंजूरी प्रदान की गई। इसके अलावा जाइका से लोन और मेट्रो के लिए 30 कर्मियों की नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव पर सहमति बनी। पीएमआरसी बोर्ड ने 2024 तक मेट्रो का निर्माण कार्य पूरा करने लक्ष्य तय किया है।

बैठक में पटना मेट्रो से जुड़े सभी पक्षों पर लंबी चर्चा हुई। रुपए के इंतजाम, कर्ज लेने, इसे चुकाने, बनाने वाली कंपनी की फीस से लेकर रूट तक की बातें। पटना मेट्रो बोर्ड के लिए 191 पदों को मंजूरी मिली। फिलहाल 30 पदों पर बहाली होगी। दो-तीन दिनों में इन तमाम मसलों से संबंधित प्रस्ताव राज्य कैबिनेट की स्वीकृति के लिए जाएगा।

अहम बात यह है कि डीएमआरसी ने सबसे सस्ते दर पर पटना मेट्रो के लिए निर्माण की मंजूरी दे दी है। बोर्ड के सीएमडी ने बताया कि 511 करोड़ रुपये लेकर डीएमआरसी पटना मेट्रो के निर्माण को अमलीजामा पहनाएगी। बोर्ड तीनों प्रस्ताव को शीघ्र ही नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजेगा। इसके बाद कैबिनेट से मंजूरी लेने की कवायद शुरू होगी। बोर्ड की बैठक में निदेशक संजय दयाल के अलावा भवानी नंदन, विनोदानंद झा और पंकज कुमार उपस्थित थे।

मेट्रो में 20-20 % होगा केंद्र व राज्य का हिस्सा

बिहार सरकार ने पटना मेट्रो के लिए राशि का प्रबंध करने की कवायद भी शुरू कर दी है। मेट्रो के लिए तैयार डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में तीन माध्यम से फंड जुटाने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए 20-20 फीसद राशि केंद्र और राज्य सरकार देगी, जबकि 60 फीसद राशि ऋण से जुटाई जाएगी। इंदिरा भवन स्थित पीएमआरसी (पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन) मुख्यालय में बुधवार को हुई बैठक में भूमि अधिग्रहण को लेकर विचार-विमर्श किया गया।वायद शुरू होगी। बोर्ड की बैठक में निदेशक संजय दयाल के अलावा भवानी नंदन, विनोदानंद झा और पंकज कुमार उपस्थित थे।

उधर, सरकार 20 फीसद फंड जुटाने के लिए वैकल्पिक उपायों की तलाश भी कर रही है। इसके तहत राजधानी में पेट्रोल, डीजल, गैस, बिजली, सीएनजी, गृहकर आदि पर सेस लगाने की योजना है। मेट्रो के परिचालन खर्च को कम करने के लिए सरकार इसको सिंगल ट्रैक पर संचालित करने पर विचार कर रही है। साथ ही रेल व स्टेशनों पर विज्ञापन से होने वाली कमाई से भी परिचालन लागत निकालने का प्रस्ताव तैयार भी किया जा रहा है।

बोर्ड की बैठक में मेट्रो स्टेशन पर बनने वाले भवन को भी किराए पर देने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। यही नहीं, पटना मेट्रो का परिचालन शुरू होने पर शहर में बढ़ने वाले ट्रैफिक के संभावित दबाव को ध्यान में रखते हुए यूनिफाईड मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट ऑथोरिटी (उमटा) के गठन की भी पहल की जा रही है। दरअसल, भारत सरकार ने मेट्रो पॉलिसी-2017 के तहत मेट्रो की मंजूरी वाले शहरों में एक वर्ष के अंदर उमटा के गठन का प्रावधान अनिवार्य कर रखा है।

उमटा की मिलेंगी जिम्मेदारियां, तय करेगी किराया और व्यवस्था

सरकार का मानना है कि मेट्रो की शुरुआत होने पर परिवहन व्यवस्था को मैनेज करना चुनौती होगी। ऐसे में उमटा यह सुनिश्चित करेगा कि यात्रियों को एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी कैसे मुहैया कराई जाए। इसके तहत मेट्रो स्टेशन या सार्वजनिक स्थल से शहर के दूसरे हिस्सों के लिए ऑटो, बस और ई-रिक्शा आदि सार्वजनिक परिवहन की सुगम व्यवस्था और किराया प्राधिकार तय करेगा। गठन के बाद उमटा सबसे पहले शहर का कॉम्प्रीहेंसिव मोबलिटी प्लान तैयार कराएगा। इसमें सड़कों पर वर्तमान दबाव के साथ ही मेट्रो शुरू होने पर पड़ने वाले दबाव का अध्ययन करते हुए उसके हिसाब से नीति तैयार की जाएगी।

पटना मेट्रो परियोजना जमीन पर उतरने के बाद राजधानी में परिवहन प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी उमटा की होगी। उमटा में सरकार द्वारा नामित अध्यक्ष के अलावा विकास प्राधिकार, नगर विकास विभाग, पटना नगर निगम, परिवहन विभाग, वित्त विभाग, परिवहन निगम, बिहार पुलिस, पटना मेट्रो, प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और बिजली कंपनी के नामित पदाधिकारी सदस्य की जिम्मेदारी दी जाएगी।

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