बिहार चुनाव से पूर्व सीटों को लेकर दोनों गठबंधनों में घमासान

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बिहार चुनाव नजदीक आते ही सीटों को लेकर खिंचातान शुरू हो गई है। वैसे तो छोटी व क्षेत्रीय पार्टियों के लिए ये आम बात है। जैसे-जैसे चुनाव पास आता है छोटी पार्टियां बड़ी पार्टियों पर सीटों को लेकर दबाव बनाना शुरु कर देती हैं। ऐसे में एक बार फिर से इसको लेकर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति में गरमाहट का दौर शुरू हो गया है। दोनों गठबंधनों में सीटों को लेकर तना-तनी शुरू है।

गठबंधनों की छोटी पार्टियां कर रही हैं अधिक सीटों की मांग

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पहले बात विपक्ष में स्थित महागठबंधन की करें तो अभी बिखराव सी स्थिति बनती जा रही है। पिछले दिनों महागठबंधन के तीन दलों हम, रालोसपा और वीआईपी ने बैठक कर अपनी मांग रखी थी। उन्होंने इसके लिए समन्वय समिति बनाने की बात कही थी। ऐसा न होने पर उन्होंने कोई निर्णय लेने की धमकी तक दे डाली। साथ ही कांग्रेस ने भी उनके मांगो का समर्थन किया था। लेकिन राजद की चूपी ने महागठबंधन के बवाल को बढ़ा दिया। ऐसे में कांग्रेस को मध्यस्थता करने के लिए आगे आना पड़ा।

कांग्रेस के मध्यस्थता के बाद भी स्थिति में कुछ ज्यादा सुधार नहीं दिखता है। हम पार्टी के ओर से राजद को समन्वय समिति बनाने के लिए 7 दिनों का समय और मिल गया। लेकिन महागठबंधन का बवाल अभी टला नहीं है। हम पार्टी प्रमुख जीतन राम मांझी का कह दिया है कि अगर समय रहते हमारी बातों को नहीं माना गया तो हम अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

लोजपा ने बढ़ा रखी है एनडीए गठबंधन की चिंता

वहीं दूसरे ओर एनडीए गठबंधन में भी सब कुछ ठीक नहीं दिखता है। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा ने पहले ही अधिक सीटों की मांग रख दी है। उनका कहना है कि पिछले बार से कम दल इस बार एनडीए में हैं। ऐसे में लोजपा को पिछले बार की अपेक्षा अधिक सीटें मिलनी चाहिए। इसके अलावा जल्द सीटों के बंटवारे की मांग भी उन्होंने रखी है। ये विवाद अभी यहीं नहीं थमा। इसी बीच चिराग पासवान ने नीतीश कुमार से खिलाफ बयान दे कर इस गहमा-गहमी को और बढ़ा दिया है।

खैर इन सब के बीच बीजेपी ने इसमें हस्तक्षेप कर मामले को झुलझाने का प्रयास शुरु कर दिया है। बिहार चुनाव प्रभारी सांसद भूपेन्द्र यादव का बिहार दौरा तो इसी का संकेत देता है। लेकिन इसी क्रम में एक और घटना ने इस बवाल को बढ़ा दिया। चिराग पासवान ने अपनी ही पार्टी के मूंगेर जिला अध्यक्ष को उनके बयान के कारण पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया है।

ऐसे में दोनों ही गठबंधनों के बीच सीटों को लेकर बवाल चरम पर है। अभी तो दोनों ही गठबंधनों में स्थिति कुछ स्पष्ट होती नहीं दिख रही है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपने-अपने गठबंधनों में स्थिति सामान्य करने में जोर शोर से लगी हैं। खैर ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा की कौन सी पार्टी किस गठबंधन में जाती है और कौन सी पार्टी का पाला किस ओर बैठता है।