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बिहार उपचुनाव 2019 : प्रत्याशी के चुनाव पर घमासान

बिहार में खाली हुए लोकसभा और विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। विधानसभा की खाली सीटें है – बेलहर, नाथनगर, दरौैंदा, किशनगंज और सिमरी बख्तियारपुर। साथ ही समस्तीपुर लोकसभा सीट लोजपा संसद के निधन से खाली है। चुनाव आयोग के अनुसार इन सीटों पर मतदान 21 अक्टूबर को होनी है। नामांकन की प्रक्रिया 23-30 सितम्बर तक चलेगी। नामांकन 3 अक्टूबर तक वापस लिया जा सकता है। (आगे जानिए, उपचुनाव 2019 पिछले सभी उपचुनावों में सबसे अलग क्यों?)

उपचुनाव के घोषणा के साथ ही खुलकर हो रही राजनीति

उपचुनाव 2019 की घोषणा होते ही सभी राजनितिक दल तैयारियों में लग चुके है। बिहार के दोनों प्रमुख गठबंधनों में प्रत्याशी के चयन को लेकर मंथन जारी है। राजनितिक हलकों में जारी चर्चा के अनुसार दोनों गठबंधन अपने प्रत्याशियों का चयन करने में लगे हुए है। कुछ सीटों पर प्रत्याशियों का चयन हो चूका है। दूसरी ओर, कुछ सीटों पर चयन बाकी है।

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ये है सीट शेयरिंग फार्मूला

जानकारी के मुताबिक राजद 4 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ये सीटें है – बेलहर, नाथनगर, सिमरी बख्तियारपुर और दरौंदा। राजद फ़िलहाल नाथनगर से राबिया खातून और बेलहर से रामदेव यादव को उतारने की घोषणा कर चुकी है। सिमरी बख्तियारपुर से जफ़र आलम के राजद उम्मीदवार घोषित किए जाने की संभावना है। वही कांग्रेस किशनगंज विधानसभा और समस्तीपुर लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार उतर रही है।

NDA में सीट बटवारे की बात करें तो जदयू के कोटे में चार विधानसभा सीटें आयी है। बाकि सीटों पर अन्य घटक दल अपना उम्मीदवार उतरेंगे। जदयू ने तीन सीटों पर अपना उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। सिर्फ, नाथनगर सीट पर विचार जारी है। जदयू ने बेलहर से लालधारी यादव, दरौैंदा से अजय सिंह और सिमरी बख्तियारपुर से अरुण यादव को उतारने की घोषणा की है।

बदले हालात में परखे जाएंगे नए समीकरण

विधानसभा की पांच सीटें लोकसभा चुनाव में सिटींग विधायकों के चुने जाने के कारण खाली हुए है। इनमे चार सीटें जदयू के पास, जबकि किशनगंज सीट कांग्रेस के पास थी।

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वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जदयू और राजद एक साथ चुनाव लड़ी थी। जबकि इसबार हालात कुछ अलग है। इसबार जदयू जहाँ NDA का हिस्सा है, वही VIP , RLSP और HAM महागठबंधन का हिस्सा। लोकसभा चुनाव 2014 में भी यही दो प्रमुख गठबंधन चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन, इस समीकरण के हिसाब से पहली बार विधानसभा के सीटों के लिए चुनाव लड़ी जा रही है। ऐसे में सभी दलों की कोशिश क्लीनस्वीप करने की है। साथ ही भाजपा इस बार अनुच्छेद 370 में हुए बदलाव को भी परखना चाहेगी। यदि इस बदलाव को भाजपा भुनाने में सफल होती है तो पूरी संभावना है कि विधानसभा चुनाव 2020 में इसका बखूबी इस्तेमाल करेगी। वही, महागठबंधन के पास खोने के नाम सिर्फ किशनगंज विधानसभा है।

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