तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार को घेरा, प्रवासी मजदूरों को घर बुलाने कि मांग

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बिहार के नेता प्रतिपक्ष और युवा नेता तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार से अपने फेसबुक और ट्विटर पेज से लाइव आकर आग्रह किया है कि बिहार सरकार को केंद्र सरकार से बात कर अन्य राज्यो में फंसे बिहारी मजदूरों को उनके घर बुलाने का कोई उचित रास्ता निकलना चाहिए। उन्होंने अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों से भी अपील करते हुए कहा है कि, इस महामारी की विषम परिस्थिति में थोड़ा धैर्य से कम लेना चाहिये। आगे उन्होंने मजदूरों से अपील करते हुए कहा की उनकी छोटी गलती उनके परिवार और समाज की लिए घातक साबित हो सकता है।

तेजस्वी यादव ने आगे कहा है कि बिहार सरकार को समझना चाहिए कि बाहर काम करने वाले मजदूर एक कमरे में 20 लोग रहते हैं, ऐसे में उनसे सोशल डिस्टेंसिग का पालन नहीं हो पा रहा है। घर लौटने के लिये इन मजदूरों का सड़क पर उतरना सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। जब उतराखंड में फंसे हज़ारों गुजरातियों को डिलक्स बस में विशेष इंतज़ाम कर गुजरात सरकार द्वारा अहमदाबाद लाया जा सकता है तो फिर बिहार के ग़रीब मजदूरों को 21 दिनों बाद भी साधारण ट्रेन में वापस क्यों नहीं लाया जा सकता?

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया का लिया सहारा

आगे उन्होंने सवाल किया कि विदेशों से जो लोग घर वापस आए उनकी स्क्रीनिंग कर उन्हें अपने घर तक पहुंचाया गया, उसी तरह देश के सभी ग़रीब प्रवासी लोगों की स्क्रीनिंग कर उन्हें भी अपने घर क्यों नहीं भेजा जा सकता है। सुबह ट्वीटर के माध्यम से अपील करने के बाद शाम को अपने फेसबुक पेज से लाइव आते हुए तेजस्वी यादव ने लिखा कि “बिहार की सेवा करने और रक्षा करने को कतरा-कतरा अर्पित है। हम विपक्ष में रहते हुए अपने स्तर से सीमित संसाधनों के साथ हर बिहारवासी की मदद करने के लिए हरसंभव प्रयत्न कर रहे है। आप भी अपने स्तर से करिए।”

राजद नेता तेजस्वी ने कहा कि अगर उन्हें देश भर में खड़ी रेलगाड़ियों में सोशल डिस्टेंसिंग का ख़्याल रखकर वापस घर भेज दिया जाए तो क्या दिक्कत है? अमीर और ग़रीब के लिए अलग-अलग क़ानून नहीं हो सकता? संकट की घड़ी में हम अपने लोगों को ऐसे नहीं छोड़ सकते। यह सरकार की नैतिक ज़िम्मेवारी है।

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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल करते हुए कहा कि क्या राहत कैम्पों में रहने वाले बाहर से लौटे किसी मजदूर में कोई एक भी पॉज़िटिव केस मिला? तो फिर इन लोगो को क्यों उनके हाल पर छोड़ दिया गया। मुसीबत की घड़ी में हर कोई अपने घर लौटना चाहता है।