हाईकोर्ट का विचित्र फैसला, तीन माह अस्पताल में सेवा करने का निर्देश

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जमानत चाहिए तो तीन माह कोरोना संक्रमितों की सेवा करो। ऐसी विचित्र सजा पटना हाईकोर्ट का फैसला में रखी है। पटना हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में सजा सुनाया है। जिसमें उसने अभियुक्त को तीन माह तक मरीजों की सेवा करने पर जमानत देने की बात कही है।

पटना हाईकोर्ट ने बेगूसराय के एक मामले में सजा सुनाया है। जो कि बेगूसराय के एससी एसटी अभियुक्त के एक मामले पर आधारित है। जिसमें उस अभियुक्त को जमानत के लिए कोर्ट ने विचित्र शर्त रखी है। जिसमें अभियुक्त को स्वंय कोरोना संक्रमितों की सेवा करनी होगी। मनोज कुमार इस मामले में अभियुक्त हैं।

मनोज कुमार बेगूसराय सिविल सर्जन कार्यालय में रिपोर्ट करेंगे। वे इस मामले में 25 जनवरी से अभियुक्त हैं। जिसमें पकड़े जाने पर उन्हें जेल में रखा गया था। उन्हें एससी एसटी मामले में अभियुक्त बनाया गया था। इस मामाले में पटना का बिल्डर अभियुक्त है। इस मामले में जमानत के लिए उन्होंने याचिका दायर की थी। उस मामले कि सुनवाई न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय कर रहे थे। उन्होंने आदेश दिया कि अभियुक्त 3 माह तक आवेदक जिला स्वास्थ्य केन्द्र में काम करेंगे।

हाईकोर्ट का फैसला सजा पहले भी आ चुका है

पटना हाईकोर्ट के द्वारा यह पहली अनोखी सजा नहीं है। इससे पूर्व भी हाईकोर्ट ऐसी सजा सुना चुका है। कोर्ट ने शराब पकड़े जाने पर भी कुछ ऐसी ही सजा सुनाई थी। जिसमें जब्त शराब के हिसाब से पीएम कोयर फंड में दंड शुल्क जमा कराया था। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अंजनी कुमार शरण द्वारा फैसला दिया गया था। इस मामले में शराब का एक ट्रक पकड़ा गया था। इस मामले में 5 हजार, 10 हजार और 7 हजार जुर्माना लगा था। इसके अलावा 3 हजार रुपए का भी जुर्माना लग चुका है। इस तरह कोर्ट के आदेश पर पीएम केयर फंड में काफी राशी जमा हुई है। पीएम केयर फंड में ऐसी सजा से 3 लाख रुपए जमा हुए हैं।

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