गुरूवार, फ़रवरी 29, 2024
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कैसा होगा बिहार में शिक्षा का स्तर, जब विश्वविद्यालय की हालत है ऐसी?

बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालय में परीक्षा सत्र में देरी की वजह से लाखों विद्यार्थियों का करियर प्रभावित हो रहा है, साथ ही उन्हें भविष्य के कई अच्छे अवसरों से भी वंचित होना पड़ रहा है। सरकार के सीधे नियंत्रण वाले 13 विश्वविद्यालयों में से 8 की स्थिति तो बेहद निराशाजनक है। ऐसे में बिहार में शिक्षा स्तर के सुधार के लिए बहुत मेहनत करने की आवश्यकता है।

इन विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर की परीक्षाएं और परिणाम तय समय से काफी पीछे हैं। एक तरफ़ जहां इन विश्वविद्यालयों में सत्र काफी पीछे चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ काफी समय से सिस्टम अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुंह मोड़ता दिखा। सरकार हो या विश्वविद्यालय किसी को भी विद्यार्थियों के भविष्य की कोई चिंता नहीं थी।

जवाब बेहद चौकानेवाले

पिछले दिनों राजभवन में कुलपति सहित राज्यपाल फागू चौहान की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में परीक्षा और परीक्षाफल के प्रकाशन में विलंब को लेकर दिए गए जवाब बेहद चौकानेवाले रहे। किसी ने नामांकन देर से होने तो किसी ने कई वर्षों से सत्र के लंबित रहने को इसका कारण बताया। समीक्षा बैठक के दौरान कही गई लगभग सभी बातें तथ्यों से परे हैं।

हालांकि चांसलर अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए पूरी गंभीरता दिखाई और कहा कि सभी लंबित परीक्षाएं जून 2020 तक ले ली जाए। साथ ही चांसलर ने ली गई सभी परीक्षाओं के परिणाम को घोषित करने का जिम्मा भी विश्वविद्यालय को सौंपा है। हालांकि विश्वविद्यालय के लिए डेडलाइन की इस चुनौती से पार पाना खासा आसान नहीं होगा।

बिहार की गिरती शिक्षा व्यवस्था – कारण और निदान!

विश्वविद्यालय की बिगड़ी व्यवस्था

गौरतलब है कि बिहार के चार पूर्व राज्यपाल डीवाई पाटिल, रामनाथ कोविन्द (वर्तमान राष्ट्रपति), सत्यपाल मलिक और लालजी टंडन ने भी इन विवि पर सत्र नियमित कर बिहार में शिक्षा स्तर के सुधार को सख्ती बरती थी पर नतीजा वही ढाक के तीन पात।

मगध विवि

सत्र 2016 -19 के स्नातक के दो पार्ट की परीक्षा हो चुकी है, तीसरे पार्ट की लंबित है। 2017-20 में केवल पहले पार्ट की परीक्षा हुई है। 2018-21 सत्र के किसी भी पार्ट की परीक्षा नहीं हुई है। वहीं स्नातकोत्तर में 2016-18 और 2017-19 का सत्र डेढ़ साल पीछे चल रहा है।

जेपी विश्वविद्यालय छपरा

स्नातक का 2015-18 का सत्र करीब डेढ़ साल पीछे चल रहा है। दूसरे पार्ट की परीक्षा चल रही है, वहीं 2016-19 के विद्यार्थी भी पार्ट-2 की ही परीक्षा दे रहे हैं। पीजी में भी 2016-18 का सत्र 28 माह पीछे है। 2018-20 और 2019-21 में यहां अब तक नामांकन भी नहीं हुआ है।

पाटलिपुत्र विवि

स्नातक स्तर की स्थिति कमोबेश कुछ हद तक ठीक है लेकिन पीजी में 2018-20 के पार्ट वन की ही परीक्षा हुई है। इस विश्वविद्यालय को सितम्बर से मई के बीच इस सत्र के तीन सेमेस्टर की परीक्षा लेने की चुनौती है।

पूर्णिया विवि

इस विश्वविद्यालय ने राजभवन को यूजी, पीजी और व्यावसायिक कोर्सों की परीक्षाओं तथा रिजल्ट की तिथि तय कर राजभवन को सौंपी है तथा आश्वस्त किया है कि जून 2020 तक सत्र नियमित हो जाएगा।

वीकेवीएस आरा

वीकेवीएस आरा विश्वविद्यालय यूजी और पीजी में सत्र छह माह से अधिकतम 11 माह तक विलंबित है। इसके कारण विश्वविद्यालय ने छात्र-छात्राओं को 36 असम्बद्ध कॉलेजों में नामांकन ले लेने को बताया है।

बीएन मंडल विवि

यहां स्नातक में 2015-18 सत्र का रिजल्ट नहीं आया है। बाद के सत्र के विद्यार्थियों की भी परीक्षाएं करीब 16 महीना देेेर हैं। पीजी 2016-18 भी 20 माह लेट से चल रहा है।

तिलकामांझी विवि

2016-19 का स्नातक रिजल्ट क्लियर है लेकिन 2017-20 सत्र 14 माह पीछे चल रहा। वहीं स्नातकोत्तर 2016-18 सत्र 21 माह विलंबित है। 2017-19 सत्र भी 16 माह लेट चल रहा।

बीआरए बिहार

स्नातक स्तर की परीक्षाएं महीनों, जबकि पीजी स्तर की परीक्षाएं सालभर विलंबित हैं। 2017-19 का दो सेमेस्टर का परीक्षा यहां बाकी है।

Badhta Bihar News
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