नहाए खाए के साथ आज से छठ पूजा शुरू, सात समंदर पार भी हैं कई बिहार

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नहाए खाए के साथ आज से छठ पूजा शुरू, सात समंदर पार भी हैं कई बिहार
नहाए खाए के साथ आज से छठ पूजा शुरू, सात समंदर पार भी हैं कई बिहार

छठ की छटा बताती है कि छठ पूजा अब ग्लोबल हो गया है। छठ के माध्यम से अपनी संस्कृति और विरासत का पूरी दुनिया में शानदार विस्तार हो रहा है। बिहार के गांव-गांव से निकलकर छठ का व्रत न सिर्फ हिन्दुस्तान के दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे मेट्रो शहरों तक अपितु अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया तक जा पहुंचा है। मतलब, हमने अपनी पैतृक जमीन भले ही छोड़ दी है, हमारी धड़कनों के साथ हमारी परंपराएं और संस्कृतियां जीवित हैं, सुशोभित हैं। अगर नदी, पोखरा, बीच, स्विमिंग पूल में अनुमति नहीं मिले तो लोग टब में ही खड़े होकर छठ का व्रत करते हैं। यही आस्था और विश्वास है कि सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रहा है।

युगांडा में छठव्रत

युगांडा में वहां लोग छठव्रत अपने घरों में करते थे या इक्का-दुक्का लोग साथ में करते थे। धीरे-धीरे कई स्थानों पर सामूहिकता में करने लगे। वहां आज भी भारतीयों के घरों में अफ्रीकन लड़कियां बहुतायत में काम करती हैं। अब तो युगांडा वाले कई दोस्त तंजानिया, नाइजीरिया और केन्या में भी चले गए हैं। दरभंगा के मनोज चौधरी, जो अभी पश्चिमी अफ्र्रीका के बेवरेज कंपनी में कंसल्टेंट हैं, बताते हैं कि अब तो बनाना आइसलैंड पर छठ पूजा मनाया जा रहा है। बिहारी कनेक्ट के चेयरपर्सन उदेश्वर सिंह बताते हैं कि यूके के दोनों बड़े शहरों लंदन और बमिर्ंघम में भी छठ सामूहिक रूप में होने लगा है।

बमिर्ंघम यूके में छठ

गीतांजलि मल्टी लिंगुअल लिट्रेरी सर्किल, बमिर्ंघम के जनरल सेक्रेटरी और पेशे से चिकित्सक डॉ. कृष्ण कन्हैया अपनी पत्नी डॉ.अंजना के साथ 24 सालों से बमिर्ंघम यूके में रहते हैं। डॉ.अंजना सिन्हा चिकित्सक हैं और पिछले 13 सालों से इस कठिन व्रत को लगातार करती आ रही हैं। डॉ.अंजना बताती हैं कि नहाय-खाय, खरना और छठ पूजा के लिए सामग्री हम अपने गैरेज के अंदर बनाते हैं। शाम और सुबह का अघ्र्य घर के पीछे पैडलिंग पूल में साफ पानी भरने के बाद गंगाजल छिड़ककर करते हैं। पूजा की सारी चीजें हमें यहां सोहोरोड हैन्सवर्थ बमिर्ंघम सिटी में मिल जाती है। लोगों की संख्या 30-40 की होती है।

अमेरिका के सिलिकॉन वैली में छठ

अमेरिका की बिजनेस वुमेन और सोशल एक्टिविस्ट संध्या सिंह, पटना बोरिंग कैनाल रोड के आनंदपुरी की रहने वाली हैं। पिछले 40 साल से अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में रह रहीं हैं। उन्होंने बताया कि यहां छठ समुद्र और खाड़ी के किनारे, नदियों के पास या किसी स्विमिंगपूल में भी जाकर होता है। ह्यूस्टन का क्लीयरलेक (गैल्विस्टनबे) पॉपुलर स्पॉट है छठ पूजा के लिए। पहले तो लोग भारत से ही सूप-दउरी लेकर आते थे, लेकिन अब अपना बाजार नामक दुकान में मैक्सिको से इंडियन सामान आ जाता है। अब ईख, दउरी, सुथनी, सिंघाड़ा और सूप के लिए भटकना नहीं पड़ता। अमेरिका की भोजपुरी गायिका स्वस्ति पांडेय, जो अपने पति तरुण कैलाश के साथ वहां छठ पूजा भी करती हैं, स्वयं गीत-संगीत की कमान भी संभालती हैं।

सूर्यदेव की उपासना का महापर्व छठ

भगवान सूर्यदेव की उपासना का महापर्व छठ पूजा आज नहाए खाए के साथ ही शुरू हो जाएगा। शहर के देउलबंध और सती उद्यान तलाब के छठ घाट के साथ तालाब व नदियों के तट पर मुख्य रूप से श्रद्वालु भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। छठ महापर्व का धार्मिक महत्ता के साथ वैज्ञानिक महत्व भी है। माना जाता है कि छठ महापर्व में भगवान सूर्य को अर्घ्य देने पर सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणों से शरीर की रक्षा होती है। अस्ताचल और उदयाचल सूर्य को नमन करने से स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। जो इस पर्व के वैज्ञानिक महत्व को दर्शाता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से भी काफी महत्व

सूर्य अराधना के इस महापर्व का पौराणिक महत्व के साथ-साथ लोकरीति व वैज्ञानिक दृष्टि से भी काफी महत्व है। आधुनिक युग में इस पर्व ने ग्राम्य जीवन और लोक परंपराओं को जीवित रखने में योगदान दिया है। छठ पर्व की परंपरा में बहुत ही वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व भी छिपा हुआ है। ज्योतिष के जानकार पं. रजनीकांत मिश्रा के अनुसार कार्तिक शुक्ल माह की षष्ठी तिथि एक विशेष खगोलीय अवसर है। इस समय धरती के दक्षिणी गोलार्ध में सूर्य रहता है और दक्षिणायन के सूर्य की अल्ट्रावायलट किरणें धरती पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाती हैं। क्योंकि इस दौरान सूर्य अपनी नीच राशि तुला में होता है। इन दूषित किरणों का सीधा प्रभाव जनसाधारण की आंखों, पेट, स्कीन आदि पर पड़ता है।

मोक्ष प्राप्ति का श्रेष्ठ साधन सूर्य उपासना

इस पर्व के पालन से सूर्य प्रकाश की इन पराबैंगनी किरणों से जन-साधारण को हानि न पहुंचे, इस अभिप्राय से सूर्य पूजा का गूढ़ रहस्य छिपा हुआ है। सूर्य की उपासना के इस पर्व का सबसे पहले उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। ऐसी कई कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें सूर्य की महिमा और छठ पर्व को करने के विधान बताए गए हैं। विष्णुपुराण, भगवतपुराण, ब्रह्मपुराण में भी छठ पर्व का उल्लेख मिलता ही है। इस बारे में पं. मनोज रमाकांत मिश्र ने कहा कि वैसे तो छठ का पुराणों में बहुत उल्लेख मिलता है। इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी है।

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इसे लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं रामायण काल से लेकर महाभारत काल तक इसका उल्लेख मिलता है। उन्होंने बताया कि एक कथा के अनुसार ऋषि अर्क को स्वयं आकाशवाणी से इस महान पर्व को करने की प्रेरणा मिली थी। वे कुष्ठ रोग से बुरी तरह से पीड़ित थे, पीड़ा के कारण वे अपना शरीर तक त्यागना चाहते थे, पर तभी आकाशवाणी हुई और उन्हें इस पर्व की महिमा का ज्ञान मिला। जिसके बाद ऋषि अर्क ने पूरी श्रद्धा और भक्ति से इस व्रत को किया और भगवान सूर्य की अनुकंपा से वे पूरी तरह ठीक हो गए।

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