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Friday, June 18, 2021
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जन्मदिन विशेष- बिहार केशरी एवं प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह

आघुनिक बिहार के निर्माता डा. श्री कृष्ण सिंह स्वतंत्रता-संग्राम के अग्रगण्य सेनानियों में से रहे है। इनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र एवं जन-सेवा के लिये समर्पित था। स्वाधीनता की प्राप्ति के बाद बिहार के नवनिर्माण के लिए उन्होंने जो कुछ किया उसके लिए बिहारवासी सदा उनके ऋणी रहेंगे। उनके उदार एवं निष्कलंक चरित्र में बुद्ध की करूणा, गाँधी की नैतिकता एवं सदाचार परिवेष्ठित थी।

श्रीकृष्ण बाबू का प्रारंभिक जीवन

बिहार केशरी श्रीकृष्ण सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1887 को बिहार के नवादा जिले में खानवा में हुआ था। उनका पैतृक गांव मौर्य, उस समय के मुंगेर जिला, बारबीघा के पास है, जो अब शेखपुरा जिले का हिस्सा है। उनके पिता भुमहार परिवार के एक धार्मिक, मध्यम श्रेणी के सदस्य थे। उनकी मां, जो एक निर्विवाद और धार्मिक विचारधारा वाली व्यक्ति थी, पांच वर्ष की उम्र में प्लेग से मर गईं। वह गांव के स्कूल में और मुंगेर के जिला स्कूल में शिक्षित थे। 1906 में वह पटना कॉलेज में शामिल हो गए, जो तब कलकत्ता विश्वविद्यालय का एक सहयोगी था। उन्होंने कानून का अध्ययन किया और 1915 से मुंगेर में अभ्यास करना शुरू किया।

सत्याग्रह एवं आंदोलन

वर्ष 1927 में वह विधान परिषद के सदस्य बने और 1929 में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने। 1930 में सिन्हा ने गढ़पुरा में नमक सत्याग्रह में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गिरफ्तार किए जाने पर उन्हें अपने हाथों और सीने में गंभीर जख्मी की चोटों का सामना करना पड़ा, उन्हें छह महीने तक कैद कर दिया गया और फिर उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया और सिविल अवज्ञा आंदोलन के दौरान दो साल तक कैद कर दिया गया। उन्हें गांधी-इरविन संधि के बाद रिहा कर दिया गया और फिर उन्होंने अपने राष्ट्रवादी काम के साथ शुरू किया और किसान सभा के साथ काम किया। 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह के लिए गांधीजी ने उन्हें बिहार का प्रथम सत्याग्रही नियुक्त किया था।

बिहार के विकास में सहयोग

श्रीकृष्ण सिंह बिहार के पहले मुख्यमंत्री थे और 1937 में पहली बार कांग्रेस के मंत्रालय से 1961 में उनकी मृत्यु तक सत्ता में थे। श्रीबाबू के कार्यकाल में बिहार में जहां जमींदारी प्रथा समाप्त हुई, वहीं उनके कार्यकाल में बिहार में एशिया का सबसे बड़ा इंजीनइरिंग उद्योग, हैवी इंजीनीयरिंग कॉरपोरेशन, भारत का सबसे बड़ा बोकारो इस्पात प्लांट, देश का पहला खाद कारखाना सिंदरी में, बरौनी रिफाइनरी, बरौनी थर्मल पॉवर प्लांट, पतरातू थर्मल पॉवर प्लांट, मैथन हाइडेल पावर स्टेशन एवं कई अन्य नदी घाटी परियोजनाएं स्थापित किया गया। वह एक नेता थे जिनकी दृष्टि कृषि और उद्योग दोनों के संदर्भ में बिहार को पूरी तरह से विकसित राज्य के रूप में देखना था। वास्तव में, बिहार देश के पहले पांच साल की योजना में उनके तहत अच्छा प्रदर्शन करने वाला शीर्ष राज्य बन गया।

सांस्कृतिक एवं सामाजिक विकास में योगदान

सिंह ने राज्य के सांस्कृतिक और सामाजिक विकास में एक बड़ा योगदान दिया। उन्होंने बिहार के छात्रों के लिए कलकत्ता में राजेंद्र छात्र निवास, पटना में अनुग्रह नारायण सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज, बिहार संगीत नृत्य नाट्य परिषद, पटना में संस्कृत कॉलेज, पटना में रविंद्र भवन, राजगीर वेणु वान विहार में भगवान बुद्ध की प्रतिमा इत्यादि जैसे अनेक निर्माण करवाए थे।

नव बिहार के निर्माता के रूप में बिहार केसरी डा. श्रीकृष्ण सिंह का उदात्त व्यक्तिगत, उनकी अप्रतिम कर्मठता एवं उनका अनुकरणीय त्याग़ बलिदान हमारे लिए एक अमूल्य धारोहर के समान है जो हमे सदा-सर्वदा राष्ट्रप्रेम एवं जन-सेवा के लिए अनुप्रेरित करता रहेगा। आज का विकासोन्मुख बिहार डा. श्रीकृष्ण सिंह जैसे महान शिल्पी की ही देन है जिन्होंने अपने कर्मठ एवं कुशल करो द्वारा राज्य की बहुमुखी विकास योजनाओं की आधारशिला रखी थी।

जनजन में व्याप्त बिहार केशरी

उनके निधन पर राष्ट्रकवि दिनकर ने अपनी त्वरित टिप्पणी में बिहार के “श्री” हीन होने का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, ‘शासक के रूप में श्री बाबू की अनेक विशेषताओं में से एक बड़ी विशेषता यह भी थी कि वे अल्पसंख्यकों के हितों के प्रबल पोषक और पहरेदार थे। यदि हम बिहार में इस उदार परंपरा को आगे भी कायम रख सकें तो यही श्री बाबू के प्रति हमारी सबसे महान श्रद्धांजलि होगी।

श्री बाबू के विषय में भारत के कुछ विभूतियों के विचार

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद– श्री बाबू एक महान वक्ता थे जहाँ भी वे भाषण करने को खड़े होते थे जनता प्रभावित हो उठती थी । देश के लिए बलिदान-भावना उनके व्यक्तित्व की विशेषता थी। 

जवाहर लाल नेहरू श्री बाबू का ज्ञान बड़े-से-बड़े पुस्तकालय की पुस्तकों में समाहित ज्ञान के समान था  

संत विनोबा भावे – वे अपने दिल की बातों को छिपाना तो जानते ही नही थे। तालाब के स्वच्छ पानी की तरह उनके हृदय में क्या भरा है साफ-साफ दिखाई पड़ता था। 

हमारी सच्ची श्रद्धाजंलि

डा0 श्री कृष्ण सिंह मे श्रेष्ठ मानवोचित गुण भरे थे। वे सतत सारस्वत साधक के अलावा स्वच्छ राजनीतिज्ञ, अनासक्त कर्मयोगी, सर्वगुण-सम्पन्न त्यागी तथा मानवता के महान हितैषी थे। हम सब उनके पदचिह्नों पर चल पाये तो मानव कल्याण का राज्य मार्ग निश्चित रूप से प्रशस्त होगा और यही इस उदारचेता एवं प्रज्ञा पुरूष के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।

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1 COMMENT

  1. ऐसे महापुरुष की कर्मस्थली को अपराध और हत्यारे की फैक्टरी लोग कहते हैं। बहुत आश्चर्य हो रहा है कि आखिर यह सब कैसे हुआ? क्यों आज बिहार सबसे पिछड़े और बीमारू राज्य के रूप में चर्चित है?

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