विश्वप्रसिद्ध सोनपुर मेला कैसे पहुंचे, कहाँ रहें?

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सोनपुर विश्वप्रसिद्ध पशु मेला की तैयारियां लगभग पूरी हो गई है। बिहार में वार्षिक सोनपुर मेला एक जीवंत ग्रामीण मेला है जो आध्यात्मिकता, कामुकता और पशु व्यापार को जोड़ता है। सोनपुर मेला कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा और गंडक नदी के संगम पर स्थित सोनपुर में आयोजित किया जाता है। इसे हरिहर क्षेत्र मेला भी कहा जाता है और यह पूरे विश्व में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। आज तक, यह एशिया का सबसे बड़ा मवेशी मेला है और लगभग एक महीने तक चलता है।

सोनपुर और हरिहरनाथ मंदिर का इतिहास

जाहिर है, सोनपुर मेला प्राचीन मूल भारत के पहले सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल से चलता आ रहा है, यहाँ सम्राट अपनी सेना के लिए हाथियों और घोड़ों को खरीदते थे। ऐसा कथित है की मूल रूप से, मेले का स्थान हाजीपुर था और सोनपुर के हरिहरनाथ मंदिर में इसकी पूजा की जाती थी। हालांकि, मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल के दौरान, मेले का स्थान सोनपुर चला गया।

माना जाता है कि हरिहरनाथ मंदिर का निर्माण मूल रूप से भगवान श्रीराम के द्वारा किया गया था, जब वो राजा जनक की सभा में माता सीता का हाथ जीतने के लिए जा रहे थे। यह कहा जाता है कि बाद में राजा मन सिंह ने मंदिर की मरम्मत करवाई थी। हरिहरनाथ मंदिर, जैसा कि आज है, राजा राम नारायण द्वारा बनाया गया था, जो मुगल काल के दौरान एक प्रभावशाली व्यक्ति थे।

मेले का आकर्षण

जैसे राजस्थान का पुष्कर मेला ऊंटों के लिए प्रसिद्ध है, वैसे ही सोनपुर मेला में सजाए गए हाथियों की एक विस्तृत श्रृंखला है। इन विशालकाय लेकिन सभ्य हाथियों के लिए एक अलग हाथी बाजार बनाया गया है। इसके अलावा, यह जीवंत मेला विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षियों, कुक्कुट, कैटल इत्यादि के खरीद बिक्री के लिए तैयार हो चूका है।

मेले में हर तरह की दुकानें सजने सवरने लगी है। सोनपुर मेला में विभिन्न स्टालों पर लकड़ी और पीतल के कृषि उपकरण, वस्त्र, इत्र, हस्तशिल्प, बर्तन जैसे सामान भी उपलब्ध रहते हैं। हर तरह की खेल-खेलौने, झूला, मौत के कुआँ, थियेटर, खान-पान के सामान की दुकानो के साथ जाड़े के मौसम में ऊनी कपड़ों की बिक्री के लिए स्टॉल लगने शुरू हो गए हैं।

विश्वप्रसिद्ध सोनपुर मेले की खासियत है कि यहां हाथी से लेकर सूई तक मिलता है, लेकिन एक और खासियत है यहां लगने वाले थियेटर, जिसमें बार गर्ल्स का डांस होता है। यहां काफी भीड़ उमड़ती है।

सोनपुर मेला में व्यवस्था

मेले में पर्याप्त मात्रा में बिजली की आपूर्ति करने का दावा बिजली विभाग के द्वारा की जा रही है। वही मेले क्षेत्र में अस्थायी शौचालय, पीने के लिए पानी, साफ-सफाई, घाटो को साफ-सफाई की व्यवस्था की जा रही है। मेले में किसी तरह की कमी न हो इसके लिए जिलाधिकारी से लेकर जिला मुख्यालय के विभिन्न विभाग के अधिकारी, प्रखंड अधिकारी, समाजसेवी, जनप्रतिनिधियो ने भी कमर कस ली है। सभी लोगो ने मेले की तैयारियों में दिन-रात एक करते हुए मेले को चार चाँद लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे है।

मेले के परिसर में पर्यटक विभाग और सूचना जन सम्पर्क विभाग द्वारा तेजी से काम चल रहा है। लोगों की सुरक्षा के लिए सैकड़ो की संख्या में पुलिस जवान तैनात रहेंगे। कार्यक्रम स्थल के अंदर बाहर अत्याधुनिक उपकरण की मदद से गतीविधियों पर नजर रखने के लिए दर्जनों सीसीटीवी भी लगाए जा रहे हैं।  मेले में लगभग 20 अस्थायी थाने लगाए गए हैं जिससे सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नही होगी।

कैसे पहुंचे सोनपुर मेला

सोनपुर सड़कमार्ग से पटना (55 किमी), मुजफ्फरपुर (35 किमी) और हाजीपुर (5 किमी) से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। पटना हवाई अड्डा 30 किमी की दूरी पर भी है। सोनपुर जंक्शन निकटतम रेलवे स्टेशन है। कोई भी सोनपुर यात्रा करने के लिए इनमें से किसी भी शहर से टैक्सी किराए पर ले सकता है।
वायुमार्ग- निकटतम हवाई अड्डा पटना हवाई अड्डा है, जो सोनपुर से 30 किमी की दुरी पर स्थित है। पटना हवाईअड्डा प्रमुख भारतीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
रेलमार्ग- सोनपुर जंक्शन सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है। हाजीपुर जंक्शन भी बहुत दूर नहीं है।
सड़कमार्ग- निकटतम बस स्टैंड हाजीपुर में है, जो सोनपुर से लगभग 5 किमी दूर है। सोनपुर पहुंचने के लिए टैक्सी सेवाओं का लाभ उठाया जा सकता है।

ठहरने के लिए व्यवस्था

मेले में ठहरने के लिए वही बहुत सारे छोटे-छोटे कैंप बनाये गए है। बिहार पर्यटन विभाग द्वारा बनाये गए रिसॉर्ट भी है जो एक अच्छा विकल्प है। पर्यटक लॉज पश्चिमी शैली के वाशरूम के साथ मेले में आने वाले लोगों के लिए अच्छा विकल्प है। छोटे होटल और गेस्ट हाउस भी हैं। आप इस दौरान रहने के लिए हाजीपुर, जो निकटतम स्थान है और जहाँ बहुत सारे होटल्स भी उपलब्ध है, जा सकते हैं।

२१ नवम्बर से शुरू हो रहे इस मेले का बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी विधिवत उद्घाटन करेंगे। उसके बाद मशहूर भजन गायक अनूप जलोटा अपने आवाज़ से वहां मौजूद हजारों लोगों को मंत्र मुग्ध करने में कोई कसर नही छोड़ेंगे।

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