अरवल में कुर्था के परसन बिगहा सरकारी विद्यालय की स्थिति भगवान भरोसे

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  • मात्र दो शिक्षक के भरोसे हो रही डेढ़ सौ छात्र-छत्राओं की पढ़ाई
    अरवल। स्वामी विवेकानंद ने कहा कि किसी भी समाज अथवा समुदाय की विकास में शिक्षा की स्थान सर्वोपरी है और इसके बगैर किसी का भला नहीं हो सकता। वही केंद्र की मोदी अथवा बिहार की नीतीश सरकार भी क्षिक्षा के प्रति दृढ संकल्पित होकर इस विभाग को आगे बढ़ाने के लिये कृत संकल्पित हैं।  इस बावत अरवल जिले की कुर्था प्रखंड के थाना क्षेत्र में परसन बिगहा राजकीय मध्य विद्यालय की स्थिति के साथ यहां के स्थानीय निवासियों के प्रति संवाददाता ने जानकारी लेनी चाही तो उसके होश उड़ गये।

इस संबंध में स्थानीय लोगों ने संवाददाता को बताया कि कुर्था विधानसभा क्षेत्र के कुर्था प्रखंड के कोदमरई पंचायत के सैदपुर गांव टोला परसन बिगहा में के लोगों ने विकास के बाद अपने क्षेत्र के विद्यालय में घोर कमी के बारे में बोलते नहीं थके। इस दौरान गांव के बुचन काका ने कहा कि मैं क्या बोलूं मेरी उम्र 60 के पार हो चुकी है,मेरी तो बस चिंता यहां के नौनिहाल बेटे-बेटियों की है। वहीं उन्होंने अफ़सोस जाहिर करते हुये कहा कि एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य की सरकार नीतीश कुमार शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिये कृत संकल्पित हैं।

दो शिक्षक के भरोसे ढाई सौ छात्र- छत्राओं की पढ़ाई

वहीं परसन बिगहा के राजकीय विद्यालय में मात्र दो शिक्षक के भरोसे ढाई सौ छात्र- छत्राओं की पढ़ाई होती है। विद्यालय में व्याप्त घोर कमी के बावत गांव के नरहरी बाबा ने बताया कि बाबू राजकीय विद्यालय में मात्र सात कमरे और चार शौचालय हैं। शौचालय भी ऐसी की किसी कमरे में दरवाजे नहीं हैं।

विद्यालय के सात कमरे दरवाजा और खिड़की के बगैर

वही विद्यालय के सात कमरे दरवाजा और खिड़की के बगैर हैं। विद्यालय परिसर में एक चापाकल है जो बीते डेढ़ से दो सौ वर्षों से पानी नहीं दे रही है। वर्तमान समय में यह शोभा की वस्तु बनकर खड़ी है। वहीं बच्चों की शारीरिक विकास के लिये विद्यालय के पास न तो अपनी खेल मैदान है और बच्चों को मध्याह्न भोजन की मेनू भी भगवान भरोसे है।

अंत में जब संवाददाता ने स्थानीय विधायक अथवा मुखिया और सरपंच से इस बारे में शिकायत करने की बात कही तो मौके पर उपस्थित ग्रामीणों ने बताया कि सभी लोग मिले-जुले हैं, शिकायत भी करें तो किससे, कौन सुनेगा-किसको सुनाऊं इसलिये चुप रहते हैं।

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