बिहार विधानसभा चुनाव कराने पर हर पार्टी की ‘अपनी ढपली, अपना राग’

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राज्य का यह दुर्भाग्य ही है कि जहां इन नेताओं को कोरोना वायरस से जनता को महफ़ूज रखने के लिए सोचना चाहिए था, वहां से अपनी कुर्सी बचाने की सोच रहे हैं. ऐसे ही कुछ तुच्चे नेताओं में एक हैं जदयू महासचिव के सी त्यागी. जिन्हें लगता है कि इस कोरोना कहर के बीच ही विधानसभा चुनाव 2020 संपन्न होना चाहिए. दरअस,जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने तय समय पर ही बिहार विधानसभा का चुनाव कराने का समर्थन किया. उन्होंने विपक्षी दलों द्वारा चुनाव टालने की मांग को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी डर और घबराहट से उपजा कुतर्क करार दिया. इस महाश्य कहा कहना है कि जब अमेरिका में चुनाव हो सकता है तो बिहार में क्यों नहीं?

बता दें कि जदयू महासचिव त्यागी ने कहा कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा यह स्पष्ट कर चुके हैं कि बिहार चुनाव समय पर ही होंगे, आयोग द्वारा जरूरी तैयारियां की जा रही हैं. 1961 के चुनाव कानून में संशोधन का प्रस्ताव 19 जून को ही आयोग ने केन्द्रीय कानून मंत्रालय को भेजा था, जो स्वीकृत भी हो गया है. इन्होंने अपनी बेशर्मी का परियचय देते हुये नीतीश सरकार के इस बात का समर्थन किया है कि 65 वर्ष से अधिक उम्र के तथा क्वारंटाइन में रह रहे लोगों को पोस्टल बैलेट की सुविधा दी जाएगी.

त्यागी ने कहा, अमेरिका में चुनाव हो सकता है तो बिहार में क्यूं नहीं

जदयू प्रधान महासचिव ने कहा कि कोरोना तो पूरे विश्व की समस्या है, इसके बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का चलन जारी है. अमेरिका से बुरा हाल बिहार का है क्या? अमेरिका के तीन राज्यों में चुनाव हो चुका है. 3 नवम्बर को यहां प्रेसिडेंट का चुनाव होना है. कोरोना संकट के बीच अप्रैल में साउथ कोरिया में चुनाव संपन्न हुया. इसी शुक्रवार को सिंगापुर में चुनाव हुआ. अब मंगोलिया, श्रीलंका समेत कई देशों में चुनाव प्रक्रिया जारी है, तो फिर बिहार में चुनाव क्यूं नहीं हो सकता है. जदयू नेता ने कहा कि कोविद-19 के एसओपी के पालन के साथ चुनाव होने चाहिए. विदित हो कि त्यागी एनडीए के पहले नेता नहीं हैं जो चुनाव के पक्ष में हैं. इससे पहले डिप्टी सीएम सुशील मोदी, कृषि एवं पशुपालन मंत्री भी चुनाव कराने के पक्ष में अपना कुतर्क दे चुके हैं.

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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव चुनाव के पक्ष में नहीं

गौरतलब है कि बिहार के युवा नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कोरोना संकट को देखते हुये चुनाव कराये जाने के पक्ष में नहीं है. बीते दिनों उन्होंने कहा था कि एनडीए क्या लाशों के ढ़ेर पर से होकर चुनाव कराना चाहती है. तेजस्वी के इस बयान के जवाब में भाजपा नेता ने उन्हें जमकर खर-खोटी सुनायी. यहां तक कि बिहार भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा था कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव बिहार की राजनीति में अति आलोचनात्मकता, नकारात्मकता, झूठ- छल- प्रपंच और प्रोपोगंडा के मास्टर हो गए हैं. भाजपा के लोगों की जमात से तुलना करना मानसिक दिवालियापन है. दुखद है कि तेजस्वी को राष्ट्र की नीति और राजनीति समझ में नहीं आती है. भाजपा के नेतागण अपनी नागरिक जिम्मेदारियों के तहत वॉलेन्टियर करके खुद कोरोना जाँच करवा रहे हैं.