विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला नहीं लगने की घोषणा पर तीर्थयात्री और पंडा समाज में निराशा

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विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला नहीं लगने की घोषणा पर तीर्थयात्री और पंडा समाज में निराशा
विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला नहीं लगने की घोषणा पर तीर्थयात्री और पंडा समाज में निराशा
  • 3 सितंबर ले लगनी थी मेला
  • तीर्थयात्री और पंडा समाज में निराशा

गया। राज्य में जारी कोरोना के कहर के बीच गया का विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला भी स्थगित कर दिया गया। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने गया में आयोजित होनेवाले पितृपक्ष महासंगम को स्थगित करने का फैसला लिया। इसको लेकर गया के डीएम अभिषेक सिंह ने आदेश जारी कर पितृपक्ष मेला में आनेवाले पिंडदानियों द्वारा सामाजिक दूरी का अऩुपालन में होने वाली कठिनाईयों एवं संभावित संक्रमण को देखते हुए जनहित में मेला को स्थगित करने के निर्णय की जानकारी दी।

डीएम ने विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के सदस्यों के साथ बैठक की और उनसे बिहार के साथ अन्य प्रदेशों से आनेवाले तीर्थयात्रियों को इस साल कोरोना की वजह से नहीं आने के सुझाव देने का आग्रह किया। मेला में जुटनेवाली भीड़ की वजह से तीर्थयात्री, पंडा समाज एवं इससे जुड़े अन्य लोगों में कोरोना के संक्रमण की आंशका जताते हुए सरकार द्वारा ऐसा निर्णय लिया गया।

बैठक में शामिल एसएसपी राजीव मिश्रा ने कहा कि मेला का आयोजन होने पर एडवायजरी के उल्लंघन की आशंका है, ऐसा उल्ल्घंन होने पर संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, इसलिए पंडा समाज सरकार के आदेश का पालन कराने में सहयोग करे। 3 सितंबर से शुरू होने वाले 17 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष मेला में देश-विदेश से लाखों तीर्थयात्री अपने पितरों के मोक्ष की कामना के लिए पिंडदान करने के लिए आते हैं, पिंडदान करने के लिए विदेश से भी लोग यहां भारी संख्या में महिला पुरुष आते हैं।

पितृपक्ष मेला स्थगित, पंडा समाज निराश

बिहार सरकार द्वारा पितृपक्ष मेला 2020 को स्थगित किये जाने से पंडा समाज समेत स्थानीय व्यवसायी काफी निराश हैं। इस संबंध में विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के सदस्य शंभुलाल विट्ठल ने कहा कि सिंतबर माह में आयोजित होनेवाली पितृपक्ष मेला में जजमानों द्वारा दी गयी दक्षिणा से यहां के 200 से ज्यादा पंडा समाज के परिवार का सालोभर के भोजन का इंतजाम होता रहा है।

लॉकडाउन की वजह से उनलोगों की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है, इसलिए विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति एवं अन्य संगठनों ने डीएम और स्थानीय विधायक सह कृषि मंत्री को पितृपक्ष मेला आयोजित कराने के लिए आग्रह पत्र दिया था। इसमें कोरोना को लेकर जारी गाईडलाईन के पालन कराने का आश्वासन दिया गया था पर सरकार ने उनकी बातों पर गौर नहीं किया और मेला को स्थगित कर दिया।

सरकार के निर्णय का विरोध

मेला स्थगित होने से पूजा कराने वाले ब्राह्मण, पिंडदान की सामग्री, कपड़ा, मूर्ति एवं अन्य समान बेचने वाले व्यवसायियों के समक्ष भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। जिसके लिये सरकार को अब इंतजाम करना होगा। सरकार के इस निर्णय का कई लोगों द्वारा विरोध भी किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्वाभिमान मंच से जुड़े कौशलेन्द्र कुमार ने कहा कि कोरोना बंदी में बिहार सरकार चुनाव कराने के लिए तत्पर है पर सैकड़ों सालों से चली आ रही पितृपक्ष मेला की परम्परा को स्थगित कर रही है क्योंकि पिंडदान करने के लिए आनेवाले तीर्थयात्री यहां के वोटर नहीं हैं। सरकार को कोरोनाबंदी की गाईडलाईन का पालन कराते हुए पितृपक्ष मेला का आयोजन करना चाहिए।

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इस मेला में जहां पहले 5 लाख तीर्थयात्री आते थे वहीं इस साल 17 दिन के मेला में ज्यादा से ज्यादा 50 हजार तीर्थयात्री आ सकतें हैं। इतने तीर्थयात्री का सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए पिंडदान कराने की व्यवस्था सरकार को करना चाहिए।

मंत्री प्रेम कुमार द्वारा पितृपक्ष मेला आयोजित कराने की मांग

इस चुनावी साल में स्थानीय भाजपा विधायक सह बिहार सरकार के कृषि पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के मंत्री प्रेम कुमार किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहतें हैं, इसलिए उऩ्होंने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्णय के खिलाफ स्थानीय़ पंडा समाज और अन्य संगठनों की मांग का समर्थन करते हुए सीएम नीतीश कुमार को पत्र भेजकर पितृपक्ष मेला आयोजित कराने की मांग की। मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि कोरोनाबंदी में धीर-धीरे सभी गतिविधि शुरू हो रही है,ऐसे में कोरोना को लेकर जारी एडवायजरी का पालन कराते हुए पितृपक्ष मेला का आयोजन किया जाना चाहिए। इससे पंडा समाज समेत अन्य व्यवसायियों को आर्थिक रूप से राहत मिलेगी।

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