सोमवार, फ़रवरी 26, 2024
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‘चंपा से चंपारण’ – केबीसी के विजेता सुशील कुमार का नया अभियान

सोनी टीवी पर आने वाले अमिताभ बच्चन के टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) में पांच करोड़ रुपये जीतकर देश में बिहार का नाम रोशन करने वाले सुशील कुमार एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं। दरअसल सुशील आज चंपारण की खोई हुई पुरानी पहचान वापस दिलाने के लिए ‘चंपा से चंपारण’ अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के तहत सुशील कुमार अपने गृह जिला चम्पारण के चप्पे चप्पे पर चंपा का पौधा लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। सुशील कुमार ने दावा किया है कि उन्होंने अब तक 70 हजार चंपा के पौधे लगवाए हैं।

सुशील कुमार ने बताया कि चंपारण का असली नाम ‘चंपाकारण्य’ है। इस जिले की पहचान यहां के चंपा के पेड़ से होती थी, लेकिन जैसे जैसे समय गुजरता गया, यहां से चंपा के पेड़ों की संख्या काम होती चली गयी। आज हालत यह है की चंपारण जिले में चंपा का पेड़ कहीं कहीं देखने को मिलते है।

सुशील कुमार ने लगवाए चंपा के 70 हजार पौधे

सुशील कुमार ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि ‘चंपा से चंपारण’ अभियान वह पिछले एक साल से चला रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरा यह अभियान विश्व पृथ्वी दिवस के मौके पर 22 अप्रैल, 2018 से शुरू हुआ था। इसके तहत अब तक 70 हजार चंपा के पौधे चंपारण जिले में लगाए जा चुके हैं।’ उन्होंने बातचीत में आगे बताया कि शुरुआत में इस अभियान में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब यहाँ के लोग खुद ‘चंपा से चंपारण’ अभियान से जुड़ रहे हैं। सुशील कहते हैं कि चंपारण जिले के गांव से लेकर शहर और कस्बों के घरों को इस अभियान से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

इस अभियान के तहत लोग घरों में पहुंचकर उस घर के लोगों से ही चंपा का पौधरोपण करवाया जाता है। उन्होंने आगे बताया कि महीने में एक बार लगाए गए पौधे की गिनती की जाती है। गिनती की प्रक्रिया के दौरान अगर पौधा किसी वजह से सूखा या नष्ट पाया जाता है, तब फिर उस जगह पर एक और पौधा लगा दिया जाता है।

पीपल और बरगद के पेड़ भी लगाए जा रहे है

‘करोड़पति’ के रूप में पुरे देश में पहचान बना चुके सुशील की पहचान अब चंपा और पीपल वाले के रूप में हो रही है। वह कहते हैं कि ऐसा नहीं कि सिर्फ चंपा के ही पौधे लगाए जा रहे हैं। खुले स्थानों जैसे मंदिर, स्कूल परिसरों, पंचायत भवनों, और अस्पताल परिसरों में पीपल और बरगद के भी पौधे लगाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले दो महीने में लगभग 156 पीपल और 6 बरगद के पौधे लगाए गए हैं। इस कार्य में संबंधित ग्राम पंचायत के मुखिया, वार्ड पार्षदों की भी मदद ली जाती है। शुरुआत में उन्होंने अपने पैसे लगाकर चंपा के पौधे खरीदकर घर-घर जाकर लगवाए, लेकिन फिर बाद में सामाजिक लोग मदद के लिए सामने आए। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने तो 25 हजार चंपा के पौधे उपलब्ध करवाए।

बिना थाना पुलिस का एक अनूठा गांव, कोई केस और एफआईआर भी नहीं

सुशील पौधा लगाने की तस्वीर भी वे अपने फेसबुक वॉल पर डाल देते हैं। महात्मा गांधी ने चंपारण से ही सत्याग्रह की शुरुआत की थी। बाद में चंपारण क्षेत्र दो जिलों में बंट गया जो अब पूर्वी चंपाारण और पश्चिमी चंपारण के नाम से जाना जाता है। सुशील पूर्वी चंपारण के जिला मुख्यालय मोतीहारी में रहते हैं।

इस अभियान में सुशील का साथ देने वाले मोतिहारी के एक व्यवसायी आलोक दत्त बताते हैं, ‘हमारा मकसद चंपारण को न केवल पुरानी पहचान दिलवाना है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को यह बताना भी है कि इस क्षेत्र का चंपारण नाम क्यों पड़ा।’ उन्होंने कहा कि आज पेड़ को बचाकर ही पर्यावरण को संतुलित किया जा सकता है और मानव जीवन को बचाया जा सकता है।

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