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पटना: लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में इन दिग्गजों की साख दांव पर, जीतने पर मिलेगा मंत्री पद नहीं तो…

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पटना: लालच बुरी बला है, लेकिन ये बला है कि टलती नहीं, क्योंकि अक्सर चुनाव से पहले प्रदेश की जनता को ऐसे ही कुछ वादें किए जाते है, जो चुनाव के बाद भी पूरी नहीं होते। आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 में अब चौथे चरण की तैयारी है, जिसमें कई बीजेपी के कई दिग्गजों का साख दांव पर है। क्योंकि जनता पिछले पांच साल के कामों पर अपने नेता को चुन रही है, वहीं नेता अपनी कुर्सी बचाने के जुगत में लगे है। जिससे उनकी कुर्सी बच सके और वे एक बार जनता के बीच जाकर बड़े-बड़े वादे कर रहे है, जिससे जनता उन्हें वोट करें।

इन दिग्गजों का साख दांव पर

चौथे चरण में बीजेपी को अपने दिग्गजों को फिर लोकसभा भेजने की बड़ी चुनौती है। इस चरण में बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह, जो अक्सर अपने बयानों के लिए जाने जाते है, लेकिन उन्हें क्या काम किया वो तो वहां की जनता ही बताएगी। दूसरा नाम उजियारपुर से गृह मंत्री के चहेते नित्यानंद राय, जिन्हें अपनी सीट को बचाने के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है। जिनके लिए गृह मंत्री उजियारपुर की जनता को नित्यानंद राय को केंद्र में जगह देने की बात कह रहे है, लेकिन उससे उजियारपुर की जनता को क्या मिलेगा। ये अभी भी सवालों के घेरे में हैं। तीसरी चुनौती दरभंगा से गोपाल जी ठाकुर और आखिरी नेताओं की बेटे-बेटियों की, जिससे उनका करियर सेट हो जाएगा।

गिरिराज सिंह VS अवधेश राय

बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह की इस बार सीधा मुकाबला सीपीआई के अवधेश राय से है। लोकसभा चुनाव 2019 में गिरिराज सिंह ने ट्राइएंगुलर फाइट में काफी मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। उस समय गिरिराज सिंह ने सीपीआई के कन्हैया कुमार को 2 लाख 77 हजार 278 मतों से हराया था। गिरिराज सिंह को 6 लाख 92 हजार 193 वोट मिले थे और कन्हैया कुमार को 2 लाख 69 हजार 976 मत मिले थे। राजद के तनवीर हसन तीसरे नंबर पर थे और उन्हें 1 लाख 98 हजार 233 मत हासिल हुए थे।

नित्यानंद राय VS आलोक मेहता

बीजेपी के लिए उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र काफी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। यहां गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का सीधा मुकाबला राजद सुप्रीमो के करीबी और पूर्व मंत्री आलोक मेहता से है। बीजेपी के उम्मीदवार नित्यानंद राय पिछले 10 साल से लगातार उजियारपुर सीट पर जीत रहे हैं। जिनपर अब जीत की हैट्रिक बनाने की चुनौती हैं। ये सीट बीजेपी के लिए काफी चुनौती भरा है। इसका अंदाजा गृह मंत्री अमित शाह के उस भाषण से लगा सकते हैं, जिसमें उन्होंने नित्यानंद राय को महत्वपूर्ण पद देने की बात कही थी। पहली बार नित्यानंद राय साल 2014 और दूसरी बार 2019 में चुनाव जीते थे। जिनका सीधा मुकाबला राजद के आलोक मेहता और रालोसपा के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा से हुआ था।

गोपाल जी ठाकुर VS ललित यादव

दरभंगा लोकसभा सीट पर भी बीजेपी को अपनी सीट बचाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ेगा। यहां के सीटिंग सांसद गोपाल जी ठाकुर की टक्कर राजद के ललित यादव से है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दरभंगा से गोपाल जी ठाकुर को चुनाव लड़ाया। बीजेपी को प्रत्याशी बदलने का फायदा ये हुआ कि उसके वोट में 22.61 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। गोपाल जी ठाकुर ने राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी को 2 लाख 67 हजार 979 मतों के अंतर से हराया। गोपाल जी को 5 लाख 86 हजार 668 मत मिले और अब्दुल बारी सिद्दकी को 3 लाख 18 हजार 689 वोट से संतोष करना पड़ा।

समस्तीपुर और मुंगेर में किसका होगा करियर सेट

बिहार पिछले कई सालों से बेरोजगारी की मार झेल रहा है, क्योंकि यहां नई कोई कंपनी है और न रोजगार का साधन। वहीं यहां के नेता अपने बेटे और बेटी की करियर सेट करने के लिए चुनावी मैदान में है। जो उनकी चुनावी विरासत को आगे बढ़ा सके। समस्तीपुर लोकसभा सीट पर एनडीए की ओर से एलजेपीआर की शांभवी चौधरी मैदान में हैं, जो बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी की बेटी है। वहीं, इंडिया एलायंस की ओर से कांग्रेस के सन्नी हजारी मैदान में हैं, जो बिहार सरकार के मंत्री महेश्वर हजारी के बेटे हैं। जबकि, मुंगेर लोकसभा सीट पर एनडीए की ओर से राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह मैदान में हैं। इनका मुकाबला आरजेडी की अनीता देवी से हैं, जो क्रिमिनल रहे अशोक महतो की पत्नी हैं।

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