होली पर खूब याद आए लालू यादव, जानें कैसी होती थी उनकी होली

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होली पर खूब याद आए लालू यादव, जानें कैसी होती थी उनकी होली
होली पर खूब याद आए लालू यादव, जानें कैसी होती थी उनकी होली

आज होली पूरे देश में तो धूमधाम से होली अवश्य मनायी, मगर सियासी गलियारों में होली की खनक नदारद रही। सियासी गलियारों में होली का रंग फीका रहने की वजह फिर चाहे कोरोना वायरस का खौफ कहें या कुछ और, लेकिन सच तो यह है कि बिहार में इस साल राजनेताओं की सियासी होली का रंग पूरी तरह फीका दिखा। राष्‍ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की चर्चित रही कुर्ताफाड़ होली भी उनके जेल में रहने के कारण लगातार तीसरे साल नहीं हो रही है। उस होली में लालू अपने ठेठ गंवई अंदाज में ढ़ोल लेकर बैठ जाते थे। फाग गायन का दौर चलता था। इस दौरान बड़े व छोटे का भेद मिट जाता था और लालू अपने अंदाज में लोगों से कनेक्‍ट करते थे।

लोगों से कनेक्‍ट करता था लालू का कुर्ताफाड़ होली

होली आए और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की होली याद न आए, ऐसा कैसे हो सकता है? तीन साल पहले तक लालू प्रसाद यादव के पटना स्थित सरकारी आवास पर होली का जो रंग जमता था, उसपर देश क्‍या, विदेशों तक में लोगों की नजरें रहतीं थींहोली के रंग में रंगे लालू का गंवई अंदाज उन्‍हें लोगों से कनेक्‍ट करता था। आम से लेकर खास तक, सबों के कपड़े फाड़ दिए जाते थे। इस होली में रंगों से सराबोर अपने फटे कुर्ते में लालू का अंदाज गजब ढ़ाता था।

ढोल-मंजीरा के साथ होरी गाने बैठते थे लालू

लालू यादव के चारा घोटाला में सजा पाकर रांची के होटवार जेल में सजा काटने व इस दौरान बीमार होकर रिम्‍स अस्‍पताल में भर्ती होने के कारण तीन साल से ऐसी होली नहीं मनाई जा रही। लेकिन उनकी कुर्ताफाड़ होली को आरजेडी नेता-कार्यकर्ता याद करते हैं। लालू खुद ढोल-मंजीरा लेकर नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ दरवाजे पर फाग गाने के लिए बैठ जाते थे। राबड़ी देवी भी इसमें सबों का देती थीं।

लालू की होली होती थी कुछ ऐसी

आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की होली के लिए लोग सुबह सात बजे से ही उनके आवास पर पहुंचने लगते थे। फाग के बीच रंग का दौर चलता था। दोपहर होने तक कुर्ताफाड़ होली शुरू हो जाती थी। सभी के कुर्ते फाड़ दिए जाते थे। नेता व कार्यकर्ता का भेद मिट जाता था। लोग लालू यादव का कुर्ता भी फाड़ देते थे। गोशाला से लाए गए गोबर व कीचड़ से होली का नया दौर चलता था। अपराह्न दो बजे के बाद शुरू होता था अबीर-गुलाल और होली गायन का दौर। होली के लोक गीतों के बीच लालू यादव खुद ढोल बजाते थे।

आद के दिन याद आ ही जाती लालू की सियासी होली

बता दें कि लालू यादव की इस होली का रंग साल 1997 से 2000 तक खूब जमा। फिर कुछ व्‍यवधानों के बाद बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद इसका दौर फिर शुरू हुआ। लेकिन इधर सरकार गिरी, उधर लालू भी चारा घोटाला में सजा पाकर जेल में चले गए। इसके बाद से लालू की उस यादगार होली की रौनक तीन साल से नहीं दिखी है। तीन साल से उनकी होली जेल में ही मन रही है।

विदित हो कि लालू प्रसाद यादव का जेल जाना व उनके पक्ष-विपक्ष में राजनीति को हटा दें तो बिहार में उनकी होली लाजवाब रही है। उनके विरोधी भी इसे स्‍वीकार करते हैं। जब भी बिहार की सियासी होली की बात होती है, लालू की होली बरबस याद आ जाती है।

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